महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दशकों से चला आ रहा एक ऐसा ‘अभेद्य’ रिकॉर्ड, जिसे तोड़ना दुनिया की किसी भी बल्लेबाज के लिए एक नामुमकिन सपने जैसा माना जाता था, वह आखिरकार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया है। टीम इंडिया की स्टार बल्लेबाज और उपकप्तान स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) ने एशिया कप के मुकाबले में ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि क्रिकेट जगत की पुरानी तमाम दीवारें बौनी साबित हो गईं।
मैदान पर चौकों-छक्कों की ऐसी आंधी आई जिसने पूर्व भारतीय कप्तान मिताली राज के उस ऐतिहासिक ताज को हिलाकर रख दिया, जिस पर सालों से किसी दूसरे दावेदार की छाया तक नहीं पड़ी थी। हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ खेले गए इस ऐतिहासिक मुकाबले में मंधाना ने न केवल मैच का रुख एकतरफा किया, बल्कि एक ही झटके में महिला क्रिकेट के दो सबसे बड़े ऑल-टाइम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को अपने नाम दर्ज करा लिया। हर क्रिकेट प्रेमी की जुबान पर अब यही सवाल तैर रहा है कि आखिर मंधाना ने मैदान पर ऐसा कौन सा करिश्मा कर दिखाया, जिसने विश्व क्रिकेट की पूरी अंकतालिका को हिलाकर रख दिया है।
जब मैदान पर शुरू हुआ चौकों-छक्कों का तूफान
मुकाबले की शुरुआत में जब भारतीय टीम टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले 90 मिनट के भीतर एक नया इतिहास लिखा जाने वाला है। विरोधी टीम की गेंदबाजों ने कसी हुई लाइन-लेंथ से शुरुआत करने की पूरी कोशिश की, लेकिन क्रीज पर उतरी स्मृति मंधाना के इरादे कुछ और ही थे।
पारी के शुरुआती कुछ ओवरों में मंधाना ने परिस्थितियों को पूरी परिपक्वता से परखा। उन्होंने गेंद की गति और उछाल का सटीक मुआयना किया। लेकिन जैसे ही स्मृति मंधाना पिच की मिजाज से वाकिफ हुईं, मैदान के चारों ओर बल्ला घुमाना शुरू कर दिया। पहले पावरप्ले के भीतर ही विरोधी खेमे के माथे पर पसीना साफ दिखने लगा था। मंधाना ने कवर ड्राइव से लेकर मिड-विकेट के ऊपर से ऐसे पुल शॉट्स खेले, जिन्हें देखकर कमेंटेटर्स भी अपनी सीटों से उछल पड़े। हॉन्गकॉन्ग की कप्तान ने कई फील्डिंग बदलाव किए, रिंग को डीप किया, लेकिन गेंद हर बार दर्शकों के बीच जाकर ही गिर रही थी।
64 गेंदों में 124 रन: मैदान पर आया मंधाना नाम का बवंडर

जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, मंधाना की बल्लेबाजी का तेवर और ज्यादा आक्रामक होता चला गया। शुरुआत में संभलकर खेलते हुए उन्होंने अपना अर्धशतक 40 गेंदों में पूरा किया था। लेकिन अर्धशतक के बाद जो खेल उन्होंने दिखाया, वह महिला टी20 इतिहास में विरले ही देखने को मिलता है।
अगले 50 रन स्मृति मंधानाने केवल 17 गेंदों के भीतर कूट डाले। उन्होंने मैदान के हर कोने का इस्तेमाल किया। ऑफ साइड हो या लेग साइड, कोई भी गेंदबाज उनके बल्ले की मार से बच नहीं सकी। जब वे 124 रन बनाकर नाबाद पवेलियन की ओर देख रही थीं, तब स्कोरबोर्ड पर उनके खाते में 14 चौके और 7 लंबे छक्के दर्ज हो चुके थे। उनका स्ट्राइक रेट 190 के पार जा चुका था। उनकी यह 124 रनों की पारी महिला एशिया कप के इतिहास का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बन गई, जिसने श्रीलंका की दिग्गज चमारी अटापट्टू के 119 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
वो जादुई आंकड़ा: मिताली राज का 10,868 रनों का साम्राज्य खत्म
इस पारी के दौरान जब स्मृति मंधाना ने अपना 112वां रन पूरा किया, तब पूरे स्टेडियम में खड़े होकर दर्शकों और साथी खिलाड़ियों ने तालियां बजाईं। यह सिर्फ एक शतक का जश्न नहीं था, बल्कि महिला क्रिकेट के सबसे बड़े मुकाम को हासिल करने का पल था।
पूर्व दिग्गज भारतीय कप्तान मिताली राज ने अपने 23 साल के सुनहरे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों को मिलाकर कुल 10,868 रन बनाए थे। लंबे समय से यह माना जाता था कि इस आंकड़े के आसपास पहुंचना भी लगभग नामुमकिन है। लेकिन स्मृति मंधाना ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के केवल 302वें मुकाबले में इस आंकड़े को पार कर लिया और अब उनके नाम 10,880 अंतरराष्ट्रीय रन हो चुके हैं। वे अब आधिकारिक रूप से महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली दुनिया की नंबर-1 बल्लेबाज बन चुकी हैं।
महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन (सभी फॉर्मेट):
- स्मृति मंधाना (भारत): 10,880 रन
- मिताली राज (भारत): 10,868 रन
- सूजी बेट्स (न्यूजीलैंड): 10,740 रन
- शार्लोट एडवर्ड्स (इंग्लैंड): 10,273 रन
- स्टेफनी टेलर (वेस्टइंडीज): 10,007 रन
दूसरा महा-कीर्तिमान: मेग लैनिंग का शतकीय रिकॉर्ड भी तोड़ा
मिताली राज के रनों के साम्राज्य को पीछे छोड़ने के साथ ही मंधाना ने उसी मैच में एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया। यह रिकॉर्ड था महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने का।
अब तक ऑस्ट्रेलिया की पूर्व महान कप्तान मेग लैनिंग के नाम 17 अंतरराष्ट्रीय शतकों का विश्व रिकॉर्ड दर्ज था। लेकिन हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ इस आतिशी पारी के साथ ही स्मृति मंधाना ने अपने करियर का 18वां अंतरराष्ट्रीय शतक ठोक दिया। इस शतक के साथ वे महिला क्रिकेट में दुनिया की सबसे ज्यादा सेंचुरी लगाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। साथ ही, वे भारत की पहली ऐसी महिला क्रिकेटर भी बनीं जिनके नाम टी20 अंतरराष्ट्रीय में 2 या उससे अधिक शतक दर्ज हैं।
विरोधी टीम का सरेंडर और भारत की 137 रनों से ऐतिहासिक जीत
मंधाना के इस तूफान की बदौलत भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट खोकर 193 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। 194 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी हॉन्गकॉन्ग की टीम दबाव के आगे पहले ही ओवर से बिखरने लगी।
भारतीय गेंदबाजों ने मंधाना के बनाए माहौल का पूरा फायदा उठाया। ऑफ स्पिनर दीप्ति शर्मा और तेज गेंदबाजी आक्रमण के सामने विपक्षी बैटर्स टिक नहीं सकीं। एक के बाद एक विकेट गिरते चले गए और पूरी हॉन्गकॉन्ग की टीम 16.2 ओवरों में महज 56 रनों पर सिमट गई। भारत ने यह मुकाबला 137 रनों के विशाल अंतर से जीतकर शान से एशिया कप के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया।
‘क्वीन मंधाना’ का युग: भारतीय महिला क्रिकेट का स्वर्णिम काल
स्मृति मंधाना की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि भारतीय महिला क्रिकेट अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विश्व पटल पर राज कर रही है। जब मिताली राज ने संन्यास लिया था, तब कइयों को अंदेशा था कि क्या भारत को दोबारा कोई ऐसी बल्लेबाज मिलेगी जो निरंतरता के साथ दुनिया भर के मैदानों पर राज कर सके।
स्मृति मंधाना ने न केवल उस खालीपन को भरा है, बल्कि उसे एक नए और आक्रामक आयाम तक पहुंचा दिया है। 28 साल की उम्र में ही इन दो महानतम रिकॉर्ड्स को अपने नाम कर लेना यह दर्शाता है कि उनका आने वाला सफर अभी और कई नई ऊंचाइयों को छूने वाला है। अब पूरी दुनिया की नजरें सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां फैंस को मंधाना के बल्ले से एक और जादुई पारी की उम्मीद रहेगी।




